गुरुवार, १९ नवम्बर २००९

संतोषी

रल, सरस, मधुमय वाणी से,


................... जिनके हृदय सुशोभित हों।


रो ज खुशी की भोर हो ऐसी,


.................... सबके मन आलोकित हों॥


ग में जन्म मिला है तो हम,


..................... मानव हित के कर्म करें।


ठा नें हम परहित करने की,


..................... कहीं कभी न शर्म करें॥


कु न्दन ज्यों तप-तप कर निखरे,


................... त्यों कर्मों से खुशी मिले।


हते जो " संतोषी " बनकर,


................. उनके तन-मन दिखें खिले॥

- विजय तिवारी " किसलय "

सोमवार, ९ नवम्बर २००९

ऐसी हैं पुण्य सलिला माँ नर्मदा -- दूसरा भाग







धुआँधार
 जल प्रपात 
के  पहले  







धुआँधार
दृश्य








धुआँधार
दृश्य










धुआँधार

दृश्य



 



धुआँधार

दृश्य



 





धुआँधार
दृश्य



 






धुँआधार
दृश्य



 







 धुँआधार
दृश्य



 











धुँआधार से  आगे  की ओर




लम्हेटा घाट दुर्लभ भूगर्भीय  " लम्हेटाईट " चट्टानें .

श्री अरुण यादव, इंजी. सुधीर पाण्डेय, विजय तिवारी " किसलय "
----------------------------------------------------------------
दिनांक ८ नवम्बर २००९ को इंजिनियर सुधीर पाण्डेय "व्यथित" , कहानीकार श्री अरुण यादव और मैंने जबलपुर , मध्य प्रदेश के पावन तट लम्हेटाघाट से विश्व प्रसिद्ध जल प्रपात धुआँधार तक नर्मदा के किनारे किनारे पैदल चल कर पुण्य सलिला माँ नर्मदा के दर्शन कर जो तृप्ति प्राप्त की है उसका वर्णन तो यहाँ कर पाना असंभव है, लेकिन मैंने नर्मदा के सौन्दर्य को अपनी स्मृति में संजोया है , उन में से कुछ चित्रों को आप सब को अवश्य बताना चाहूँगा, ताकि आप भी माँ के सौन्दर्य को देख कर कुछ तो आत्म संतुष्टि पा सकें. ---
- विजय तिवारी " किसलय "

रविवार, ८ नवम्बर २००९

ऐसी हैं पुण्य सलिला माँ नर्मदा -- प्रथम भाग

दिनांक ८ नवम्बर २००९  को    इंजिनियर सुधीर  पाण्डेय "व्यथित" , कहानीकार श्री अरुण  यादव और मैंने  जबलपुर , मध्य प्रदेश के पावन तट लम्हेटाघाट से विश्व प्रसिद्ध जल प्रपात धुआँधार तक नर्मदा के किनारे किनारे पैदल चल कर पुण्य सलिला माँ नर्मदा के दर्शन कर जो तृप्ति प्राप्त की है उसका वर्णन तो यहाँ कर पाना असंभव है, लेकिन मैंने  नर्मदा के  सौन्दर्य को अपनी स्मृति में संजोया है , उन में से  कुछ चित्रों को आप सब को  अवश्य   बताना चाहूँगा, ताकि  आप  भी माँ के सौन्दर्य को देख कर कुछ तो आत्म संतुष्टि पा सकें. ---  














-विजय तिवारी " किसलय ", जबलपुर